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Ghazal " Wakt k siwa ku6 v nhi badalta"

Wakt k siwa ku6 v nhi badalta "कुछ भी नहीँ बदला है, तेरे जाने से, कुछ भी तो नहीँ बदला है,, सो जाता हूँ रात को बिस्तर पर, तकिया, पहले भी आँसुओं से, यही भिगता था, अब भी यही भिगता है,, नहीँ बदला है, कुछ भी तो नहीँ बदला है,, पहले भी तन्हा था, अब भी अकेला हूँ,, नहीँ बदला है, कुछ भी तो नहीँ बदला है,, नींद आती है, पहले तरसाती थी, अब भी तो तड़पाती है,, नहीँ बदला है, कुछ भी तो नहीँ बदला है,, ख़ाब सजते हैँ फ़िर से, उन्हीं आँखों मेँ, जो पहले चमकते थे, अब अश्कों मेँ पिघलते हैँ,, नहीँ बदला है, कुछ भी तो नहीँ बदला है,, मैँ जानता हूँ क़ि न तुम बदले हो, न मैँ बदला हूँ,, तो फ़िर क्या बदला है? जो बदला है,, ऎ वक़्त ! इतना बता हमेँ 'जुदा' करने का,, ये तेरा हम से, किस जन्म का 'बदला' है!!" By Akash Roy